शेयर बाजार (Share Market) में जो लोग नए आते हैं, वे अक्सर कैश (Equities) में 'एवरेजिंग' का कॉन्सेप्ट सीख कर आते हैं। जब कोई शेयर गिरता है, तो वे उसे निचले भाव पर खरीदकर अपना एवरेज प्राइस (Average Price) कम कर लेते हैं। लेकिन असली बर्बादी तब शुरू होती है, जब वे यही रणनीति ऑप्शंस बाज़ार (F&O) में लगाते हैं。
अगर आपने बैंक निफ्टी (Bank Nifty) या निफ्टी (Nifty 50) का कोई Call या Put ऑप्शन खरीदा है और वो माइनस (Loss) में जाने लगता है, तो क्या उसे कम कीमत पर और खरीद लेना चाहिए? अगर आप गूगल पर या यूट्यूब पर यह खोज रहे हैं कि Options Trading me Averaging karni chahiye ya nahi, तो इस पिलर पोस्ट में आपको इसका बिल्कुल सीधा, कड़वा और तकनीकी जवाब मिलने वाला है।
Options Trading me Averaging karni chahiye ya nahi? (सीधा जवाब)
अगर इसका एक लाइन में जवाब दिया जाए तो वह है— "बिल्कुल नहीं! ऑप्शंस ट्रेडिंग में लॉस को एवरेज करना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।"
ऑप्शन बाइंग (Option Buying) और डिलीवरी (Delivery/Cash) में ज़मीन-आसमान का फर्क होता है। रिलायंस या एचडीएफसी का शेयर आप 10 साल तक होल्ड कर सकते हैं, लेकिन ऑप्शंस एक 'पिघलती हुई बर्फ' (Melting Ice) की तरह होते हैं। ऑप्शंस में एक निश्चित Expiry Date होती है। अगर आपका अनुमान गलत साबित हुआ, तो उस कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू अंततः जीरो (0) हो जाएगी। ऐसे में जीरो होने वाली चीज़ को एवरेज करना, अपने कैपिटल (पूंजी) को जानबूझकर जीरो करना है।
ऑप्शंस ट्रेडिंग में एवरेजिंग करने के 5 सबसे बड़े खतरे
अगर आप अभी भी यह सोच रहे हैं कि Options Trading me Averaging karni chahiye ya nahi, तो आइए उन 5 खतरनाक कारणों को समझते हैं जो ऑप्शंस में एवरेज करने वालों को सड़क पर ले आते हैं:
1. टाइम डिके (Theta Decay) का दुश्मन
ऑप्शंस ट्रेडिंग का सबसे बड़ा विलेन 'Theta' (समय का मूल्य) होता है। जब आप कोई ऑप्शन खरीदते हैं, तो आप सिर्फ दिशा (Direction) पर दांव नहीं लगा रहे होते, बल्कि समय पर भी दांव लगा रहे होते हैं। अगर मार्केट आपकी दिशा में नहीं जाता है और वहीं खड़ा रहता है (Side ways), तो भी आपका प्रीमियम गिरता रहेगा। गिरते हुए प्रीमियम को एवरेज करने का मतलब है कि आप 'Theta Decay' के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिसमें हमेशा आपकी ही हार होगी।
2. एक्सपायरी का डर (Expiry Day Trap)
ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी (Weekly या Monthly) होती है। एक्सपायरी के दिन 'Out of the Money' (OTM) ऑप्शंस की वैल्यू शून्य हो जाती है। कई ट्रेडर्स एक्सपायरी के दिन ₹20 के ऑप्शन को गिरकर ₹10 होने पर और खरीदते हैं, फिर ₹5 होने पर और खरीदते हैं। अंत में 3:30 PM पर वह ऑप्शन ₹0 हो जाता है और उनका सारा पैसा डूब जाता है।
3. कैपिटल वाइपआउट (Capital Wiped Out) होने का रिस्क
डिलीवरी मार्केट में अगर आप ₹1 लाख का शेयर खरीदते हैं और वह 10% गिरता है, तो आपके पास ₹90,000 बचते हैं। लेकिन ऑप्शंस मार्केट में अगर आप ₹1 लाख का Call खरीदते हैं और मार्केट आपके खिलाफ तेजी से गिरता है, तो वह 1 लाख रुपये चंद मिनटों में ₹20,000 या ₹0 हो सकते हैं। अगर आप इसमें 'Average Down' करते रहेंगे, तो आप अपना पूरा बैंक बैलेंस खाली कर बैठेंगे।
4. डेल्टा (Delta) का आपके खिलाफ काम करना
जैसे-जैसे आपका ऑप्शन 'At The Money' (ATM) से 'Out of The Money' (OTM) होता जाता है, उसका 'Delta' कम हो जाता है। इसका मतलब है कि अगर मार्केट थोड़ा बहुत आपके फेवर में घूम भी गया, तो भी आपके ऑप्शन का प्रीमियम उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ेगा जितनी तेज़ी से वो गिरा था। यही कारण है कि ऑप्शंस में Options Trading me Averaging karni chahiye ya nahi का जवाब हमेशा 'ना' होता है।
5. भावनाओं (Emotions) का अनियंत्रित होना
ऑप्शंस ट्रेडिंग 80% साइकोलॉजी (Psychology) और 20% स्ट्रेटेजी है। जब आप किसी हारते हुए ट्रेड (Losing Trade) में एवरेज करते हैं, तो डर और पैनिक (Panic) बढ़ जाता है। एक छोटी सी उल्टी कैंडल (Opposite Candle) आपको हार्ट अटैक दे सकती है, क्योंकि अब आपकी क्वांटिटी (Quantity) बहुत बड़ी हो चुकी होती है।
ऑप्शंस ट्रेडिंग में नुकसान से बचने का सही तरीका क्या है?
अगर ऑप्शंस में एवरेजिंग नहीं करनी है, तो नुकसान होने पर क्या करें? इसके लिए प्रोफेशनल ट्रेडर्स सिर्फ एक जादुई मंत्र का पालन करते हैं: Stop Loss (स्टॉप-लॉस)।
- रिस्क तय करें: ट्रेड लेने से पहले ही यह तय कर लें कि इस ट्रेड में मैं अधिकतम 15% या 20% का रिस्क लूंगा।
- स्टॉप-लॉस बुक करें: अगर ट्रेड आपके खिलाफ जाता है और स्टॉप-लॉस हिट होता है, तो स्क्रीन बंद करें या उस ट्रेड से चुपचाप बाहर आ जाएँ। एवरेज करने की ज़रा भी कोशिश न करें।
- लॉस छोटा, प्रॉफिट बड़ा (Risk-Reward Ratio): ऑप्शंस ट्रेडिंग में सफल होने का एकमात्र तरीका यह है कि जब आप गलत हों तो 10 पॉइंट का लॉस लें (Stop Loss), और जब आप सही हों तो 30 या 40 पॉइंट का प्रॉफिट लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (10 FAQs)
बिल्कुल नहीं। ऑप्शंस ट्रेडिंग (खासकर ऑप्शन बाइंग) में एवरेजिंग करना अपने पैसे को आग लगाने जैसा है। इसमें 'टाइम डिके' (Theta) होता है, जिससे समय बीतने के साथ आपके प्रीमियम की वैल्यू खुद-ब-खुद कम होती जाती है।
डिलीवरी में खरीदे गए शेयर की कोई एक्सपायरी नहीं होती, आप उसे सालों तक होल्ड कर सकते हैं। लेकिन ऑप्शंस में एक निश्चित एक्सपायरी (Weekly या Monthly) होती है। एक्सपायरी के दिन OTM (Out of The Money) ऑप्शंस की वैल्यू जीरो (0) हो जाती है।
यह सबसे बड़ी गलती है जिसे 'Zero-to-Hero' के चक्कर में लोग करते हैं। एक्सपायरी के दिन टाइम डिके सबसे तेज होता है। गिरते हुए ऑप्शन को एवरेज करने से आपका पूरा कैपिटल कुछ ही मिनटों में जीरो हो सकता है।
ऑप्शन प्रीमियम में समय (Time) की एक वैल्यू होती है। जैसे-जैसे एक्सपायरी करीब आती है, वह वैल्यू घटने लगती है। भले ही मार्केट वहीं रुका रहे, लेकिन Theta Decay के कारण आपका Call या Put ऑप्शन का दाम गिरता रहेगा।
ऑप्शन सेलिंग में एवरेजिंग को 'रोल ओवर' (Roll Over) या हेजिंग (Hedging) के साथ किया जाता है, लेकिन इसमें अनलिमिटेड रिस्क होता है। एक भारी गैप-अप या गैप-डाउन ऑप्शन सेलर को बर्बाद कर सकता है। इसलिए इसमें भी स्टॉप-लॉस अनिवार्य है।
जब किसी ट्रेडर को ऑप्शंस में नुकसान होता है, तो वह गुस्से में उसे कवर करने के लिए और लॉट (Lots) खरीदता है (Averaging)। इसे रिवेंज ट्रेडिंग कहते हैं, जो अंततः कैपिटल जीरो कर देती है।
अगर ऑप्शन 50% गिर चुका है, तो उसे एवरेज करने के बजाय तुरंत काट दें (Stop Loss Book करें)। ऑप्शंस ट्रेडिंग में 'उम्मीद' (Hope) के सहारे बैठे रहना सबसे खतरनाक है।
ऑप्शंस बाज़ार पलक झपकते ही 100 पॉइंट ऊपर या नीचे जा सकता है। स्टॉप-लॉस आपकी पूंजी (Capital) को अचानक होने वाले बड़े झटकों (Spikes) और वाइप-आउट (Wipe-out) से बचाता है।
कभी नहीं। हीरो-जीरो ट्रेड असल में एक लॉटरी टिकट की तरह है। इसमें सिर्फ उतना ही पैसा लगाना चाहिए जितना आप 100% खोने के लिए तैयार हैं। गिरते हुए हीरो-जीरो ट्रेड में पैसा डालना जुआ (Gambling) है।
एवरेजिंग का सही नियम सिर्फ इक्विटी (Cash/Delivery) मार्केट में निफ्टी-50 जैसी मजबूत कंपनियों के लिए है, जहां समय आपके पक्ष में होता है। ऑप्शंस में कभी भी लॉस को एवरेज नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
शेयर बाज़ार में टिके रहने का सबसे पहला नियम यह है कि अपनी पूंजी (Capital) की रक्षा करें। जो लोग Options Trading me Averaging karni chahiye ya nahi इस सवाल का गलत जवाब चुनते हैं और गिरते हुए ऑप्शंस में पैसा डालते हैं, वे कुछ ही महीनों में मार्केट से बाहर हो जाते हैं। ऑप्शंस ट्रेडिंग में हमेशा कड़े स्टॉप-लॉस (Strict Stop-Loss) का पालन करें। अगर आपको एवरेजिंग का फायदा उठाना ही है, तो डिलीवरी (Cash Market) में मजबूत कंपनियों के शेयर खरीदें।
अस्वीकरण (Disclaimer): ऑप्शंस ट्रेडिंग (F&O) बहुत अधिक जोखिम (High Risk) के अधीन है। यह लेख केवल शैक्षिक (Educational) उद्देश्यों के लिए है। हम SEBI रजिस्टर्ड सलाहकार नहीं हैं। कृपया निवेश या ट्रेडिंग करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें।